सेवा का सर्वोच्च शिखर: माता-पिता और भाई-बहनों का प्रेम ही सच्ची ईश्वरीय भक्ति: जी. एस. लबाना
सेवा का सर्वोच्च शिखर: माता-पिता और भाई-बहनों का प्रेम ही सच्ची ईश्वरीय भक्ति: जी. एस. लबाना भारतीय संस्कृति और संस्कारों में सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है, लेकिन इस सेवा की शुरुआत मंदिर या आश्रम से नहीं, बल्कि अपने घर की दहलीज से होती है। शास्त्रों और महापुरुषों के वचनों का सार यही है कि 'माता की सेवा, साक्षात प्रभु परमात्मा की सेवा है।' जो संतान अपनी जननी के चरणों में स्वर्ग देखता है, उसे दुनिया के किसी भी तीर्थ में भटकने की आवश्यकता नहीं होती। *माता-पिता की आत्मा का सुकून है भाई-बहनों का प्रेम* अक्सर देखा जाता है कि लोग बाहरी जगत में दान-पुण्य और सेवा के कार्यों में लगे रहते हैं, लेकिन घर के भीतर भाई-बहनों के बीच मनमुटाव रहता है। वास्तव में, एक माता-पिता के लिए सबसे बड़ी खुशी और उनकी आत्मा को मिलने वाला असली सुकून तब होता है, जब उनकी संतानें आपस में प्रेम और सौहार्द के साथ रहती हैं। भाई-बहनों की निस्वार्थ सेवा और एक-दूसरे के प्रति समर्पण ही माता-पिता के प्रति सच्ची कृतज्ञता है। जो व्यक्ति अपने भाई-बहनों के दुखों को अपना समझकर उनकी सेवा करता है, वह सीधे तौर पर अ...