सरदार सूरज सिंह विंझरावत की पूज्य माता गोपी बाई सचखण्ड सिधारी:

विंझरावत परिवार में शोक की लहर:

सरदार सूरज सिंह विंझरावत की पूज्य माता गोपी बाई सचखण्ड सिधारी:




 अन्तिम संस्कार आज दोपहर 2.30 बजे


अजमेर। सचखण्ड वासी सरदार मान सिंह विंझरावत की धर्मपत्नि,  सरदार सूरज सिंह विंझरावत (ब्लैज फैशन ), सरदार गोपाल सिंह विंझरावत (पंजाबी फैशन), सरदार सुरेन्द्र सिंह, सरदार प्रताप सिंह "विक्की" की पूज्य माताजी गोपी बाई आज शुक्रवार 28 नवम्बर 2025 को प्रात: लगभग 3.30 बजे अकाल चालाणा कर सचखण्ड सिधार गई। 
90 वर्षीय माताजी के पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा आज दोपहर  2.30 बजे निवास स्थान प्लाट नं.  52, गली नं.2, बलदेव नगर, माकड़ वाली रोज, अजमेर से वैशाली नगर छतरी योजना आंतेड़ स्थित शमशान स्थल के लिये रवाना होगी।
शोकाकुल परिवार:
सरदार सूरज सिंह विंझरावत
मो. 9828053286
सरदार गोपाल सिंह विंझरावत
मो. 9214930915
9214991233
सुरेन्द्र सिंह 
प्रताप सिंह "विक्की"

  🙏 श्रध्दासुमन  🙏
माता जी को शत-शत नमन,

माता गोपी बाई के अकाल चालाणा कर सचखण्ड सिधार जाने पर महन्त सन्त बाबा सुखदेव सिंह, सम्पादक गोपाल सिंह लबाना, गुरुद्वारा श्री गुरु रामदास साहिब दरबार की समूह प्रबन्धक कमेटी, एवं लबाना सिख समाज ने शोक व्यक्त  किया है । गुरुबाणी का फरमान है : 

गुरुबाणी फरमान करती है 

"रामु गइए, रावनु गइए  जा कउ बहु परिवार । 

कहु नानक थिर कछु नही सुपने जिउ संसारु।।" 

(गुरुबाणी: साहिब श्री गुरुग्रन्थ साहिब जी पृष्ठ-1426) 

अर्थात:  गुरुबाणी मन की अवस्था को समझाती है कि संसार  स्वपन मात्र है, यहां कोई कितना भी बलवान क्यों न हो वह स्थाई तौर पर नहीं रह सकता, राम जो स्वमं शक्ति मान थे, और शक्तिशाली बहुत बड़े परिवार वाला रावन को भी जाना पढ़ा,  प्रकृति का नियम है, जो संसार में आया है उसे जाना ही पढता है, अपनों के जाने का दुख होता ही है क्योंकि हम संसारिक जीव हैं अपनों के बिछड़ने का  दुख होना स्वाभाविक है। पर हम उस प्रभु परमात्मा के आगे असहाय है, उसकी रजा को मानकर उसके आगे अरदास वेन्ती प्रार्थना ही कर सकते है कि "हे परमपिता परमेश्वर श्री हरि, वाहेगुरु कृपा  करना  द्विगंत आत्मा को सदैव अपने चरणों में निवास बक्शीश करना  और शोकाकुल परिवार जनों को  प्रियजन के बिछड़ने का  दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करना ।


माताजी ने अपने जीवन काल में सदैव साहिब श्री गुरुग्रन्थ साहिब जी की शरण में रहकर सिमरन सेवा की इन्होने आप नाम सिमरन  किया और अपने साथ संगत को नाम सिमरन में जोड़ा,
गुरुवाणी फरमान करती है
आपि जपहु अवरा नामु जपावहु ॥
सुनत कहत रहत गति पावहु ॥

(गुरुबाणी: साहिब श्री गुरुग्रन्थ साहिब जी पृष्ठ-288) 
अर्थात: स्वयं ईश्वर के नाम का जाप कर और दूसरों से भी नाम का जाप करवा।
सुनने, कहने एवं इस आचरण में रहने से मुक्ति मिल जाती है।


✍ जी.  एस. लबाना
सम्पादक लबाना जागृति


दैनिक  मरु प्रहार, अजमेर 


9414007822 🙏

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