HUKAMNAMA SRI DARBAR SAHIB, AMRITSAR ANG 717, Date 12-01-26

AMRIT VELE DA 

HUKAMNAMA 

SRI DARBAR SAHIB,

 AMRITSAR 

ANG 717,

 Date 12-01-26

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ਟੋਡੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥ 

ਸਾਧਸੰਗਿ ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਚਿਤਾਰਾ ॥ ਸਹਜਿ ਅਨੰਦੁ ਹੋਵੈ ਦਿਨੁ ਰਾਤੀ ਅੰਕੁਰੁ ਭਲੋ ਹਮਾਰਾ ॥ ਰਹਾਉ ॥ ਗੁਰੁ ਪੂਰਾ ਭੇਟਿਓ ਬਡਭਾਗੀ ਜਾ ਕੋ ਅੰਤੁ ਨ ਪਾਰਾਵਾਰਾ ॥ ਕਰੁ ਗਹਿ ਕਾਢਿ ਲੀਓ ਜਨੁ ਅਪੁਨਾ ਬਿਖੁ ਸਾਗਰ ਸੰਸਾਰਾ ॥੧॥ ਜਨਮ ਮਰਨ ਕਾਟੇ ਗੁਰ ਬਚਨੀ ਬਹੁੜਿ ਨ ਸੰਕਟ ਦੁਆਰਾ ॥ ਨਾਨਕ ਸਰਨਿ ਗਹੀ ਸੁਆਮੀ ਕੀ ਪੁਨਹ ਪੁਨਹ ਨਮਸਕਾਰਾ ॥੨॥੯॥੨੮॥

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टोडी महला ५ ॥ 

साधसंगि हरि हरि नामु चितारा ॥ सहजि अनंदु होवै दिनु राती अंकुरु भलो हमारा ॥ रहाउ ॥ गुरु पूरा भेटिओ बडभागी जा को अंतु न पारावारा ॥ करु गहि काढि लीओ जनु अपुना बिखु सागर संसारा ॥१॥ जनम मरन काटे गुर बचनी बहुड़ि न संकट दुआरा ॥ नानक सरनि गही सुआमी की पुनह पुनह नमसकारा ॥२॥९॥२८॥

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ਅਰਥ:

ਹੇ ਭਾਈ! ਜੇਹੜਾ ਮਨੁੱਖ ਗੁਰੂ ਦੀ ਸੰਗਤਿ ਵਿਚ ਟਿਕ ਕੇ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦਾ ਨਾਮ ਸਿਮਰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ (ਉਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਆਤਮਕ ਅਡੋਲਤਾ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਉਸ) ਆਤਮਕ ਅਡੋਲਤਾ ਦੇ ਕਾਰਨ (ਉਸ ਦੇ ਅੰਦਰ) ਦਿਨ ਰਾਤ (ਹਰ ਵੇਲੇ) ਆਨੰਦ ਬਣਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ। (ਹੇ ਭਾਈ! ਸਾਧ ਸੰਗਤਿ ਦੀ ਬਰਕਤਿ ਨਾਲ) ਅਸਾਂ ਜੀਵਾਂ ਦੇ ਪਿਛਲੇ ਕੀਤੇ ਕਰਮਾਂ ਦਾ ਭਲਾ ਅੰਗੂਰ ਫੁੱਟ ਪੈਂਦਾ ਹੈ।ਰਹਾਉ। ਹੇ ਭਾਈ! ਜਿਸ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦੇ ਗੁਣਾਂ ਦਾ ਅੰਤ ਨਹੀਂ ਪਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ, ਜਿਸ ਦੀ ਹਸਤੀ ਦਾ ਉਰਲਾ ਪਾਰਲਾ ਬੰਨਾ ਨਹੀਂ ਲੱਭ ਸਕਦਾ, ਉਹ ਪਰਮਾਤਮਾ ਆਪਣੇ ਉਸ ਸੇਵਕ ਨੂੰ (ਉਸਦਾ) ਹੱਥ ਫੜ ਕੇ ਵਿਹੁਲੇ ਸੰਸਾਰ-ਸਮੁੰਦਰ ਵਿਚੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢ ਲੈਂਦਾ ਹੈ, (ਜਿਸ ਸੇਵਕ ਨੂੰ) ਵੱਡੀ ਕਿਸਮਤ ਨਾਲ ਪੂਰਾ ਗੁਰੂ ਮਿਲ ਪੈਂਦਾ ਹੈ।੧। 

ਹੇ ਭਾਈ! ਗੁਰੂ ਦੇ ਬਚਨਾਂ ਉਤੇ ਤੁਰਿਆਂ ਜਨਮ ਮਰਨ ਵਿਚ ਪਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਫਾਹੀਆਂ ਕੱਟੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਕਸ਼ਟਾਂ-ਭਰੇ ਚੌਰਾਸੀ ਦੇ ਗੇੜ ਦਾ ਦਰਵਾਜ਼ਾ ਮੁੜ ਨਹੀਂ ਵੇਖਣਾ ਪੈਂਦਾ। ਹੇ ਨਾਨਕ! ਆਖ-ਹੇ ਭਾਈ! ਗੁਰੂ ਦੀ ਸੰਗਤਿ ਦੀ ਬਰਕਤਿ ਨਾਲ) ਮੈਂ ਭੀ ਮਾਲਕ-ਪ੍ਰਭੂ ਦਾ ਆਸਰਾ ਲਿਆ ਹੈ, ਮੈਂ (ਉਸ ਦੇ ਦਰ ਤੇ) ਮੁੜ ਮੁੜ ਸਿਰ ਨਿਵਾਂਦਾ ਹਾਂ।੨।੯।੨੭।

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अर्थ:

हे भाई! जो मनुख गुरु की सांगत में टिक के परमात्मा का नाम सिमरन करता रहता है (उस के अन्दर आत्मिक अदोलता पैदा हो जाती है, उस) आत्मिक अदोलता के कारण (उस के अन्दर) दिन रात (हर समय) आनंद बना रहता है। ( हे भाई! साध संगरकी बरकत से) हम जीवों के पिछले किये कर्मो का भला अंगूर फूट पड़ता है। हे भाई! जिस परमात्मा के गुणों का अंत नहीं पाया जा सकता, जिस की हस्ती का आर पार का किनारा नहीं मिल सकता, वह परमात्मा अपने सेवक को (उसका) हाथ पकड़ के खाली संसार समुन्दर से बहार निकाल लेता है, (जिस सेवक को) बड़ी किस्मत से पूरा गुरु प्राप्त होता है ।१। 

हे भाई! गुरू के बचनों पर चलने से जनम-मरण में डालने वाली फाहियां कट जाती हैं, कष्टों भरे चौरासी के चक्करों का दरवाजा दोबारा नहीं देखना पड़ता। हे नानक! (कह– हे भाई! गुरू की संगति की बरकति से) मैंने भी मालिक-प्रभू का आसरा लिया है, मैं (उसके दर पर) बार बार सिर निवाता हूँ।2।9।27।

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Meaning:

Todee, Fifth Mehl: In the Saadh Sangat, the Company of the Holy, I contemplate the Name of the Lord, Har, Har. I am in peaceful poise and bliss, day and night; the seed of my destiny has sprouted. ||Pause||

 I have met the True Guru, by great good fortune; He has no end or limitation. Taking His humble servant by the hand, He pulls him out of the poisonous world-ocean. ||1|| 

Birth and death are ended for me, by the Word of the Guru’s Teachings; I shall no longer pass through the door of pain and suffering. Nanak holds tight to the Sanctuary of his Lord and Master; again and again, he bows in humility and reverence to Him. || 2 || 9 || 28 ||

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