स्वर्गवासी सरदार सेवा सिंह रमाण के सुपुत्र सरदार हरजीत सिंह "काला" सचखण्ड सिधारे : अन्तिम अरदास रस्म रविवार 25 जनवरी को
स्वर्गवासी सरदार सेवा सिंह रमाण के सुपुत्र सरदार हरजीत सिंह "काला" सचखण्ड सिधारे :
अजमेर।
सचखण्ड वासी सरदार सेवा सिंह रमाण के सुपुत्र सरदार हरजीत सिंह "काला" की आत्मिक शान्ति एवं कल्याणार्थ अन्तिम अरदास रविवार 25 जनवरी 2026 को दोपहर 1-00 बजे स्थानीय गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सभा, गंज अजमेर में होगी।
स्वर्गवासी सरदार हरजीत सिंह "काला" के निमत परिवार जनों द्वारा अपने निवास स्थान कमला बावड़ी गंज, अजमेर में शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को प्रात: 11-00 बजे श्री अखण्ड पाठ साहिब आरम्भ करवायेंगे जिसका भोग साहिब रविवार 25 जनवरी 2026 को प्रात: 11-00 बजे पढ़ेगा, उपरान्त दोपहर 12-00 बजे से 1-00 बजे तक गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सभा, गंज अजमेर में कीर्तन दरबार सजाया जायेगा जिसमें पंथ के प्रसिद्ध रागी सिंह, कथावाचक अपनी मधुरवाणी से गुरुबाणी कीर्तन राही हरिजस गायन कर विच्छुड़ी आत्मा को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए संगत को निहाल करेगें, उपरान्त अन्तिम अरदास, हुकमनामा, एवं गुरु का लंगर प्रसाद वितरित होगा ।
ज्ञात रहे कि 66वर्षीय सरदार हरजीत सिंह "काला" बुधवार 14 जनवरी 2026 को अकाल चालाणा कर सचखण्ड सिधार गये थे,
व्यक्तिगत रुप से यह मिलनसार, शान्त स्वभाव के धनी थे,
विनम्र वेनती:
शोकुल परिवार जनों ने समूह साध संगत, रिश्तेदार एवं मित्रगणों को विनम्र वेनती की है कि समयानुसार दर्शन देकर गुरुजस स्वर्ण कर स्वर्गवासी को श्रध्दासुमन अर्पित करते हुए हमें कृतार्थ करें।.
शोकाकुल परिवार :
सरदारनी रुक्मणी कौर (माता),
प्रीतम कौर "प्पपी" (पत्नि),
अवतार सिंह "बाबू", अमरीक सिंह, सन्नी सिंह, रवि सिंह (पुत्र),
सरदारनी ईश्वरी कौर - सरदार रवि सिंह, पाली, सरदारनी खुशबु कौर- सरदार भूपेन्द्र सिंह "टोनी" गुलवाण, दिल्ली (पुत्री-दामाद),
सरदारनी गीता कौर पत्नि स्व. सरदार जोगेन्द्र सिंह (चाचा-चाची)
एवंम समस्त रमाण परिवार ।
सम्पर्क:
सरदार बाबू सिंह - 9983244047,
सरदार अमरीक सिंह 9982607859
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श्रध्दासुमन
जवाब देंहटाएंसरदार हरजीत सिंह "काला" के सचखण्ड सिधार जाने की खबर से मन को ठेस पहूंची बहुत दुख हुआ। परिजनों को कहना चाहूंगा कि अपनों के बिछड़ने का दुख असहनीय होता है लेकिन हम प्रभु परमेश्वर वाहेगुरु की इच्छा के आगे नतमस्तक हैं गुरुबाणी इस दुख की घड़ी में हमारे दुखी मन को समझाती है कि ...
*"रामु गइए, कावनु गइए जा कउ बहु परिवार । कहु नानक थिर कछु नही सुपने जिउ संसारु।।"*
(साहिब श्री गुरुग्रन्थ साहिब जी पृष्ठ-1426) अर्थात: इस दुख की घड़ी में गुरुबाणी मन की अवस्था को समझाती है कि संसार स्वपन मात्र है, यहां कोई कितना भी बलवान क्यों न हो वह स्थाई तौर पर नहीं रह सकता, राम जो स्वमं शक्ति मान थे, और शक्तिशाली बहुत बड़े परिवार वाले रावन को भी जाना पढ़ा, प्रकृति का नियम है, जो संसार में आया है उसे जाना ही पढता है,
अपनों के जाने का बहुत दुख होता ही है क्योंकि हम संसारिक जीव हैं अपनों के बिछड़ने का दुख होना स्वाभाविक है। पर हम उस प्रभु परमात्मा के आगे असहाय है, उसकी रजा को मानकर उसके आगे अरदास, प्रार्थना ही कर सकते है कि "हे परमपिता परमेश्वर श्री हरि, अकाल पुरख वाहेगुरु, निरंकार, हे श्रीराम जी कृपा करना स्वर्गवासी की आत्मा को सदैव अपने चरणों में निवास, शान्ति बक्शीश करना, पिछे शोकाकुल परिवार में सुख शान्ति, हम सभी को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करना 🙏 शत् शत् नमन
✍ जी. एस. लबाना