Mukhwak Sachkhand Sri Harmandir Sahib Amritsar Ang:632, Date 03-03-2026

Amrit Wele Da 

Mukhwak 

Sachkhand

Sri Harmandir Sahib

 Amritsar 

Ang: 632,

 Date 03-03-2026

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ਸੋਰਠਿ ਮਹਲਾ ੯ ॥ 

ਮਨ ਰੇ ਪ੍ਰਭ ਕੀ ਸਰਨਿ ਬਿਚਾਰੋ ॥ ਜਿਹ ਸਿਮਰਤ ਗਨਕਾ ਸੀ ਉਧਰੀ ਤਾ ਕੋ ਜਸੁ ਉਰ ਧਾਰੋ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥ 

ਅਟਲ ਭਇਓ ਧ੍ਰੂਅ ਜਾ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਅਰੁ ਨਿਰਭੈ ਪਦੁ ਪਾਇਆ ॥ ਦੁਖ ਹਰਤਾ ਇਹ ਬਿਧਿ ਕੋ ਸੁਆਮੀ ਤੈ ਕਾਹੇ ਬਿਸਰਾਇਆ ॥੧॥ 

ਜਬ ਹੀ ਸਰਨਿ ਗਹੀ ਕਿਰਪਾ ਨਿਧਿ ਗਜ ਗਰਾਹ ਤੇ ਛੂਟਾ ॥ ਮਹਮਾ ਨਾਮ ਕਹਾ ਲਉ ਬਰਨਉ ਰਾਮ ਕਹਤ ਬੰਧਨ ਤਿਹ ਤੂਟਾ ॥੨॥ 

ਅਜਾਮਲੁ ਪਾਪੀ ਜਗੁ ਜਾਨੇ ਨਿਮਖ ਮਾਹਿ ਨਿਸਤਾਰਾ ॥ ਨਾਨਕ ਕਹਤ ਚੇਤ ਚਿੰਤਾਮਨਿ ਤੈ ਭੀ ਉਤਰਹਿ ਪਾਰਾ ॥੩॥੪॥

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ਅਰਥ: 

ਹੇ ਮਨ! ਪਰਮਾਤਮਾ ਦੀ ਸਰਨ ਪੈ ਕੇ ਉਸ ਦੇ ਨਾਮ ਦਾ ਧਿਆਨ ਧਰਿਆ ਕਰ। ਜਿਸ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦਾ ਸਿਮਰਨ ਕਰਦਿਆਂ ਗਨਕਾ (ਵਿਕਾਰਾਂ ਵਿਚ ਡੁੱਬਣੋਂ) ਬਚ ਗਈ ਸੀ ਤੂੰ ਭੀ, (ਹੇ ਭਾਈ!) ਉਸ ਦੀ ਸਿਫ਼ਤ-ਸਾਲਾਹ ਆਪਣੇ ਹਿਰਦੇ ਵਿਚ ਵਸਾਈ ਰੱਖ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥ 

ਹੇ ਭਾਈ! ਜਿਸ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦੇ ਸਿਮਰਨ ਦੀ ਰਾਹੀਂ ਧ੍ਰੂ ਸਦਾ ਲਈ ਅਟੱਲ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ਤੇ ਉਸ ਨੇ ਨਿਰਭੈਤਾ ਦਾ ਆਤਮਕ ਦਰਜਾ ਹਾਸਲ ਕਰ ਲਿਆ ਸੀ, ਤੂੰ ਉਸ ਪਰਮਾਤਮਾ ਨੂੰ ਕਿਉਂ ਭੁਲਾਇਆ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਉਹ ਤਾਂ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਦੁੱਖਾਂ ਦਾ ਨਾਸ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਹੈ ॥੧॥ 

ਹੇ ਭਾਈ! ਜਿਸ ਵੇਲੇ ਹੀ (ਗਜ ਨੇ) ਕਿਰਪਾ ਦੇ ਸਮੁੰਦਰ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦਾ ਆਸਰਾ ਲਿਆ ਉਹ ਗਜ (ਹਾਥੀ) ਤੰਦੂਏ ਦੀ ਫਾਹੀ ਤੋਂ ਨਿਕਲ ਗਿਆ ਸੀ। ਮੈਂ ਕਿਥੋਂ ਤਕ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦੇ ਨਾਮ ਦੀ ਵਡਿਆਈ ਦੱਸਾਂ ? ਪਰਮਾਤਮਾ ਦਾ ਨਾਮ ਉਚਾਰ ਕੇ ਉਸ (ਹਾਥੀ) ਦੇ ਬੰਧਨ ਟੁੱਟ ਗਏ ਸਨ ॥੨॥ 

ਹੇ ਭਾਈ! ਸਾਰਾ ਜਗਤ ਜਾਣਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅਜਾਮਲ ਵਿਕਾਰੀ ਸੀ (ਪਰਮਾਤਮਾ ਦੇ ਨਾਮ ਦਾ ਸਿਮਰਨ ਕਰ ਕੇ) ਅੱਖ ਦੇ ਝਮਕਣ ਜਿਤਨੇ ਸਮੇ ਵਿਚ ਹੀ ਉਸ ਦਾ ਪਾਰ-ਉਤਾਰਾ ਹੋ ਗਿਆ ਸੀ। ਨਾਨਕ ਜੀ ਆਖਦੇ ਹਨ – (ਹੇ ਭਾਈ! ਤੂੰ) ਸਾਰੀਆਂ ਚਿਤਵਨੀਆਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦਾ ਨਾਮ ਸਿਮਰਿਆ ਕਰ। ਤੂੰ ਭੀ (ਸੰਸਾਰ-ਸਮੁੰਦਰ ਤੋਂ) ਪਾਰ ਲੰਘ ਜਾਏਂਗਾ ॥੩॥੪॥

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सोरठि महला ९ ॥ 

मन रे प्रभ की सरनि बिचारो ॥ जिह सिमरत गनका सी उधरी ता को जसु उर धारो ॥१॥ रहाउ ॥ 

अटल भइओ ध्रूअ जा कै सिमरनि अरु निरभै पदु पाइआ ॥ दुख हरता इह बिधि को सुआमी तै काहे बिसराइआ ॥१॥

 जब ही सरनि गही किरपा निधि गज गराह ते छूटा ॥ महमा नाम कहा लउ बरनउ राम कहत बंधन तिह तूटा ॥२॥ 

अजामलु पापी जगु जाने निमख माहि निसतारा ॥ नानक कहत चेत चिंतामनि तै भी उतरहि पारा ॥३॥४॥

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अर्थ: 

हे मन! परमात्मा की शरण आ कर उस के नाम का ध्यान धरा करो। जिस परमात्मा का सिमरन करते हुए गनका (विकारों में डूबने) से बच गई थी तूँ भी, (हे भाई!) उस की सिफ़त-सलाह अपने हृदय में वसाई रख ॥१॥ रहाउ ॥ 

हे भाई! जिस परमात्मा के सिमरन के द्वारा ध्रूअ सदा के लिए अटल हो गया है और उस ने निर्भयता का आतमिक दर्जा हासिल कर लिया था, तूँ ने उस परमात्मा को क्यों भुलाया हुआ है, वह तो इस तरह के दुखों का नाश करने वाला है ॥१॥ 

हे भाई! जिस समय ही (गज ने) कृपा के समुँद्र परमात्मा का आसरा लिया वह गज (हाथी) तेंदुए की फाही से निकल गया था। मैं कहाँ तक परमात्मा के नाम की वडियाई बताऊं ? परमात्मा का नाम सिमर कर उस (हाथी) के बंधन टूट गए थे ॥२॥ 

हे भाई! सारा जगत जानता है कि अजामल विकारी था (परमात्मा के नाम का सिमरन कर के) आँखों के झमकन जितने समय मे ही उसका पार-उतारा हो गया था। नानक जी कहते हैं – (हे भाई! तूँ) सभी इच्छों को पूर्ण करने वालेे परमात्मा का नाम सिमरिया कर। तूँ भी (संसार-समुँद्र को) पार कर जाएंगा ॥३॥४॥

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Sorath Mahalaa 9 ||

 Man Re Prabh Kee Saran Bichaaro || Jeh Simrat Gankaa See Udhharee Taa Ko Jas Ur Dhhaaro ||1|| Rahaau || 

Attal Bhaeo Dhhrooa Jaa Kai Simran Ar Nirbhai Pad Paaeaa || Dukh Hartaa Eh Bidhh Ko Suaamee Tai Kaahe Bisraaeaa ||1||

 Jab Hee Saran Gahee Kirpaa Nidhh Gaj Garaah Te Shhoottaa || Mehmaa Naam Kahaa Lau Barnau Raam Kehat Bandhhan Teh Toottaa ||2||

 Ajaamal Paapee Jag Jaane Nimakh Maahe Nistaaraa || Naanak Kehat Chet Chintaaman Tai Bhee Utreh Paaraa ||3||4||

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Meaning: 

O mind, contemplate the Sanctuary of God. Meditating on Him in remembrance, Ganika the prostitute was saved; enshrine His Praises within your heart. ||1|| Pause || 

Meditating on Him in remembrance, Dhroo became immortal, and obtained the state of fearlessness. The Lord and Master removes suffering in this way – why have you forgotten Him ? ||1|| 

As soon as the elephant took to the protective Sanctuary of the Lord, the ocean of mercy, he escaped from the crocodile. How much can I describe the Glorious Praises of the Naam ? Whoever chants the Lord’s Name, his bonds are broken. ||2||

 Ajaamal, known throughout the world as a sinner, was redeemed in an instant. Says Nanak Ji, remember the Chintaamani, the jewel which fulfills all desires, and you too shall be carried across and saved. ||3||4||

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