समय की मांग और समाज का भविष्य—डेरा संत बाबा हिम्मत सिंह साहिब का स्थानांतरण आवश्यक ​: सम्पादक - गोपाल सिंह लबाना

लबाना जागृति सन्देश:

समय की मांग और समाज का भविष्य—


डेरा संत बाबा हिम्मत सिंह साहिब का स्थानांतरण आवश्यक ​: सम्पादक - गोपाल सिंह लबाना

​इतिहास साक्षी है कि समाज और संस्थाएं वही प्रगति करती हैं जो समय की पदचाप को पहचानकर स्वयं में परिवर्तन लाती हैं। डेरा संत बाबा हिम्मत सिंह साहिब (सिंध पाकिस्तान) केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लबाना सिख समाज की अटूट आस्था, परंपरा और गौरव का प्रतीक है। सन् 1947 के विभाजन के पश्चात, हमारे पूर्वजों और श्रद्धेय संतों ने शून्य से शुरुआत कर अजमेर, दिल्ली (पहाड़गंज), कल्याण और भरतपुर में इस पवित्र दरबार की स्थापना की।

​अजमेर में महंत संत बाबा बिजय सिंह जी के कार्यकाल से लेकर वर्तमान गद्दीनशीन महंत संत सुखदेव सिंह साहिब जी के काल तक, डेरे ने अभूतपूर्व आध्यात्मिक विस्तार किया है। वर्तमान महंत जी के नेतृत्व में जिस तेज रफ्तार से विकास कार्य हुए हैं, वह हम सभी के लिए हर्ष और गर्व का विषय है।

चुनौती: बदलता परिवेश और भौगोलिक दूरी

​आज दिल्ली का पहाड़गंज क्षेत्र पूर्णतः व्यावसायिक हब बन चुका है। तंग गलियाँ, भारी ट्रैफिक और प्रदूषण के कारण श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों का दरबार तक पहुँचना अत्यंत दुष्कर हो गया है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पहाड़गंज के आसपास अब समाज की कोई बस्ती नहीं बची है।

​दूसरी ओर, दिल्ली के चन्द्र विहार और तिलक विहार जैसे क्षेत्रों में पिछले तीन दशकों में लबाना सिख समाज की एक विशाल शक्ति उभरी है। यहाँ लगभग 4,000 से 5,000 परिवार निवास करते हैं। पहाड़गंज से इस बस्ती की दूरी लगभग 50-60 किलोमीटर है, जिसके कारण दैनिक संगत का दरबार से जुड़ाव कम हो रहा है। वार्षिक जोड़ मेलों के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है—न गाड़ियों के लिए पार्किंग है और न ही बाहरी संगत (काशीपुर, मेरठ, अजमेर, जयपुर, मुंबई) के ठहरने के लिए पर्याप्त स्थान।

सुझाव: आधुनिक विजन और भविष्य की योजना

​'लबाना जागृति सन्देश' के माध्यम से हम समूह साध संगत और समूह चौरासी के प्रबुद्ध जनों से यह आह्वान करते हैं कि वे वर्तमान गद्दीनशीन महंत संत सुखदेव सिंह साहिब जी के समक्ष एक विनम्र विनती प्रस्तुत करें।

प्रस्तावित विजन:

स्थानांतरण और विस्तार: पहाड़गंज की वर्तमान भूमि के बदले चन्द्र विहार जैसे समाज बहुल क्षेत्र में उससे दोगुनी भूमि ली जाए।

आधुनिक परिसर: नए स्थान पर एक भव्य चार-पांच मंजिला भवन निर्मित हो, जिसमें विशाल दीवान हॉल, आधुनिक पार्किंग, सर्वसुविधायुक्त कमरे और एक विद्यालय (Education Center) हो, जो हमारे बच्चों के भविष्य को संवारे।

सामाजिक केंद्र: यह नया डेरा केवल गुरुद्वारा न होकर हमारे समाज के 'दुख-सुख' का केंद्र बने, जहाँ सामुदायिक आयोजनों के लिए पर्याप्त स्थान हो।

निष्कर्ष: एकजुटता की अपील

​यदि समाज की सबसे बड़ी बस्ती (चन्द्र विहार) में डेरा सुशोभित होता है, तो नई पीढ़ी अपनी जड़ों और संस्कारों से सीधे जुड़ सकेगी। यह कदम भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

​हम पूर्ण विश्वास के साथ महंत संत सुखदेव सिंह साहिब जी से आग्रह करते हैं कि वे संगत की इस भावना को स्वीकार करेंगे। समस्त संगत इस पुनीत कार्य में तन-मन-धन से अपना सहयोग देने को तत्पर है। आइए, हम सब मिलकर अपने गौरवशाली इतिहास को एक आधुनिक और सुलभ भविष्य की ओर ले चलें।


सभी समाज के प्रबुद्ध लोग अपनी राय कमेंट्स बाक्स में अवश्य दें 
जिससे समाज का मार्ग प्रशस्त हो सके ।

सम्पादक:

जी. एस. लबाना
सम्पर्क:
9414007822
9587670300

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